सुनु दसकंठ कहउँ पन रोपी

चौपाई ४, दोहा २३ के अंतर्गत · सुन्दरकाण्ड

चौपाई पाठ

सुनु दसकंठ कहउँ पन रोपी। बिमुख राम त्राता नहिं कोपी॥ संकर सहस बिष्नु अज तोही। सकहिं न राखि राम कर द्रोही॥ ४ ॥

अर्थ

हे रावण! सुनो, मैं प्रतिज्ञा कहता हूँ कि रामविमुख की रक्षा करनेवाला कोई भी नहीं है। हजारों शंकर, विष्णु और ब्रह्मा भी श्रीरामजी के साथ द्रोह करनेवाले तुमको नहीं बचा सकते।

संदर्भ

यह सुन्दरकाण्ड के “हनुमान-रावण संवाद” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा २३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में रावण की सभा में हनुमान का निर्भीक संवाद और सीता-वापसी का उपदेश का वर्णन है।

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हनुमान-रावण संवाद