मोहमूल बहु सूल प्रद त्यागहु तम
मोहमूल बहु सूल प्रद त्यागहु तम
दोहा २३ · सुन्दरकाण्ड
दोहा पाठ
मोहमूल बहु सूल प्रद त्यागहु तम अभिमान। भजहु राम रघुनायक कृपा सिंधु भगवान॥ २३ ॥
अर्थ
मोह ही जिसका मूल है, ऐसे बहुत पीड़ा देनेवाले तमरूप अभिमान का त्याग कर दो और रघुनायक, कृपा सिंधु भगवान् श्रीराम का भजन करो।
संदर्भ
यह सुन्दरकाण्ड के “हनुमान-रावण संवाद” प्रकरण का दोहा २३ है। इस प्रकरण में रावण की सभा में हनुमान का निर्भीक संवाद और सीता-वापसी का उपदेश का वर्णन है।
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हनुमान-रावण संवाद