सुनि प्रभु बचन बिलोकि मुख गात
सुनि प्रभु बचन बिलोकि मुख गात
दोहा ३२ · सुन्दरकाण्ड
दोहा पाठ
सुनि प्रभु बचन बिलोकि मुख गात हरषि हनुमंत। चरन परेउ प्रेमाकुल त्राहि त्राहि भगवंत॥ ३२ ॥
अर्थ
प्रभु के वचन सुनकर और उनके [प्रसन्न] मुख तथा [पुलकित] अंगों को देखकर हनुमानजी हर्षित हो गये और प्रेम में विकल होकर “हे भगवन्! मेरी रक्षा करो, रक्षा करो' कहते हुए श्रीरामजी के चरणों में गिर पड़े।
संदर्भ
यह सुन्दरकाण्ड के “हनुमानजी का लौटना और राम को संदेश” प्रकरण का दोहा ३२ है। इस प्रकरण में हनुमानजी का समुद्र पार लौटना, मधुवन प्रवेश, सुग्रीव मिलन और श्रीराम को सीता का संदेश व चूड़ामणि अर्पण का वर्णन है।
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हनुमानजी का लौटना और राम को संदेश