सुनि लछिमन सब निकट बोलाए
सुनि लछिमन सब निकट बोलाए
चौपाई ४, दोहा ५२ के अंतर्गत · सुन्दरकाण्ड
चौपाई पाठ
सुनि लछिमन सब निकट बोलाए। दया लागि हँसि तुरत छोड़ाए॥ रावन कर दीजहु यह पाती। लछिमन बचन बाचु कुलघाती॥ ४ ॥
अर्थ
यह सुनकर लक्ष्मणजी ने सब को निकट बुलाया। उन्हें बड़ी दया लगी, इससे हँसकर उन्होंने राक्षसों को तुरंत ही छुड़ा दिया। [और उनसे कहा--] रावण के हाथ में यह चिट्ठी देना [और कहना--] हे कुलघाती! लक्ष्मण के वचन बाँचो।
संदर्भ
यह सुन्दरकाण्ड के “शुक दूत का आना, लक्ष्मण का पत्र” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ५२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में समुद्र पार करने के उपाय, शुक दूत का आगमन और लक्ष्मण के पत्र सहित वापसी का वर्णन है।
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शुक दूत का आना, लक्ष्मण का पत्र