बहु प्रकार मारन कपि लागे

चौपाई ३, दोहा ५२ के अंतर्गत · सुन्दरकाण्ड

चौपाई पाठ

बहु प्रकार मारन कपि लागे। दीन पुकारत तदपि न त्यागे॥ जो हमार हर नासा काना। तेहि कोसलाधीस कै आना॥ ३ ॥

अर्थ

वानर उन्हें बहुत तरह से मारने लगे। वे दीन होकर पुकारते थे, फिर भी वानरों ने उन्हें नहीं छोड़ा। [तब दूतों ने पुकारकर कहा--] जो हमारे नाक-कान काटेगा, उसे कोसलाधीश श्रीरामजी की सौगंध है।

संदर्भ

यह सुन्दरकाण्ड के “शुक दूत का आना, लक्ष्मण का पत्र” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ५२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में समुद्र पार करने के उपाय, शुक दूत का आगमन और लक्ष्मण के पत्र सहित वापसी का वर्णन है।

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शुक दूत का आना, लक्ष्मण का पत्र