सुनत बिहसि बोले रघुबीरा
सुनत बिहसि बोले रघुबीरा
चौपाई ३, दोहा ५१ के अंतर्गत · सुन्दरकाण्ड
चौपाई पाठ
सुनत बिहसि बोले रघुबीरा। ऐसेहिं करब धरहु मन धीरा॥ अस कहि प्रभु अनुजहि समुझाई। सिंधु समीप गए रघुराई॥ ३ ॥
अर्थ
यह सुनकर श्रीरघुवीर हँसकर बोले--ऐसे ही करेंगे, मन में धीरज रखो। ऐसा कहकर छोटे भाई को समझाकर प्रभु श्रीरघुनाथजी समुद्र के समीप गए।
संदर्भ
यह सुन्दरकाण्ड के “शुक दूत का आना, लक्ष्मण का पत्र” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ५१ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में समुद्र पार करने के उपाय, शुक दूत का आगमन और लक्ष्मण के पत्र सहित वापसी का वर्णन है।
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शुक दूत का आना, लक्ष्मण का पत्र