श्रवनामृत जेहिं कथा सुहाई

चौपाई ४, दोहा १३ के अंतर्गत · सुन्दरकाण्ड

चौपाई पाठ

श्रवनामृत जेहिं कथा सुहाई। कही सो प्रगट होति किन भाई॥ तब हनुमंत निकट चलि गयऊ। फिरि बैठीं मन बिसमय भयऊ॥ ४ ॥

अर्थ

कानों के लिए अमृत-रूप यह सुन्दर कथा जिसने कही, वह हे भाई! प्रकट क्यों नहीं होता? तब हनुमानजी पास चले गये। उन्हें देखकर सीताजी फिरकर (मुख फेरकर) बैठ गयीं; उनके मन में आश्चर्य हुआ।

संदर्भ

यह सुन्दरकाण्ड के “श्रीसीता-हनुमान संवाद” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा १३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सीताजी को श्रीराम की मुद्रिका और संदेश देने तथा उनके प्रभु-आगमन की आशा का संवाद का वर्णन है।

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श्रीसीता-हनुमान संवाद