सिंधु तीर एक भूधर सुंदर
सिंधु तीर एक भूधर सुंदर
चौपाई ३, दोहा १ के अंतर्गत · सुन्दरकाण्ड
चौपाई पाठ
सिंधु तीर एक भूधर सुंदर। कौतुक कूदि चढ़ेउ ता ऊपर॥ बार बार रघुबीर सँभारी। तरकेउ पवनतनय बल भारी॥ ३ ॥
अर्थ
समुद्र के तीर पर एक सुन्दर पर्वत था। हनुमानजी खेल से ही (अनायास ही) कूदकर उसके ऊपर जा चढ़े और बार-बार श्रीरघुवीर का स्मरण करके अत्यन्त बलवान् हनुमानजी उस पर से बड़े वेग से उछले।
संदर्भ
यह सुन्दरकाण्ड के “हनुमानजी का लंका प्रस्थान, सुरसा परीक्षा” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा १ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में हनुमानजी का लंका प्रस्थान, सुरसा परीक्षा और छाया-ग्राहिणी राक्षसी वध का वर्णन है।
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हनुमानजी का लंका प्रस्थान, सुरसा परीक्षा