सयन किएँ देखा कपि तेही

चौपाई ४, दोहा ५ के अंतर्गत · सुन्दरकाण्ड

चौपाई पाठ

सयन किएँ देखा कपि तेही। मंदिर महुँ न दीखि बैदेही॥ भवन एक पुनि दीख सुहावा। हरि मंदिर तहँ भिन्न बनावा॥ ४ ॥

अर्थ

हनुमानजी ने उस (रावण) को शयन किये देखा; परन्तु महल में जानकीजी नहीं दिखायी दीं। फिर एक सुन्दर महल दिखायी दिया। वहाँ (उसमें) भगवान का एक अलग मन्दिर बना हुआ था।

संदर्भ

यह सुन्दरकाण्ड के “लंकिनी वध और लंका प्रवेश” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में हनुमानजी द्वारा स्वर्णमयी लंका दर्शन, लंकिनी को परास्त कर सूक्ष्म रूप से नगर प्रवेश का वर्णन है।

पूरा प्रकरण पढ़ें

पूरा प्रकरण पढ़ें
लंकिनी वध और लंका प्रवेश