सपनें बानर लंका जारी

चौपाई २, दोहा ११ के अंतर्गत · सुन्दरकाण्ड

चौपाई पाठ

सपनें बानर लंका जारी। जातुधान सेना सब मारी॥ खर आरूढ़ नगन दससीसा। मुंडित सिर खंडित भुज बीसा॥ २ ॥

अर्थ

स्वप्न में [मैंने देखा कि] एक बंदर ने लंका जला दी। राक्षसों की सारी सेना मार डाली गयी। रावण नग्न है और गदहे पर सवार है। उसके सिर मुँड़े हुए हैं, बीसों भुजाएँ कटी हुई हैं।

संदर्भ

यह सुन्दरकाण्ड के “श्रीसीता-त्रिजटा संवाद” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ११ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सीता और त्रिजटा के संवाद तथा शुभ स्वप्न द्वारा आशा का संचार का वर्णन है।

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श्रीसीता-त्रिजटा संवाद