सकल सुमंगल दायक रघुनायक गुन गान

दोहा ६० · सुन्दरकाण्ड

दोहा पाठ

सकल सुमंगल दायक रघुनायक गुन गान। सादर सुनहिं ते तरहिं भव सिंधु बिना जलजान॥ ६० ॥

अर्थ

श्रीरघुनाथजी का गुणगान सम्पूर्ण सुमंगलों का दायक है। सादर सुनने वाले भवसागर को बिना जलयान के ही तर जायँगे।

संदर्भ

यह सुन्दरकाण्ड के “श्रीराम गुणगान की महिमा” प्रकरण का दोहा ६० है। इस प्रकरण में श्रीराम के गुणगान और भक्ति की अपार महिमा तथा मंगलकारी फल का वर्णन है।

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श्रीराम गुणगान की महिमा