सादर तेहि आगें करि बानर
सादर तेहि आगें करि बानर
चौपाई १, दोहा ४५ के अंतर्गत · सुन्दरकाण्ड
चौपाई पाठ
सादर तेहि आगें करि बानर। चले जहाँ रघुपति करुनाकर॥ दूरिहि ते देखे द्वौ भ्राता। नयनानंद दान के दाता॥ १ ॥
अर्थ
विभीषणजी को आदरसहित आगे करके वानर फिर वहाँ चले, जहाँ करुणाकर श्रीरघुनाथजी थे। नेत्रों को आनन्द का दान देनेवाले दोनों भाइयों को उन्होंने दूर ही से देखा।
संदर्भ
यह सुन्दरकाण्ड के “विभीषण की राम शरण” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ४५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में विभीषण के लंका त्यागकर श्रीराम की शरण में आने और प्रभु द्वारा कृपापूर्वक स्वीकार किए जाने का वर्णन है।
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विभीषण की राम शरण