राम तेज बल बुधि बिपुलाई

चौपाई १, दोहा ५६ के अंतर्गत · सुन्दरकाण्ड

चौपाई पाठ

राम तेज बल बुधि बिपुलाई। सेष सहस सत सकहिं न गाई॥ सक सर एक सोषि सत सागर। तव भ्रातहि पूँछेउ नय नागर॥ १ ॥

अर्थ

श्रीरामचन्द्रजी के तेज (सामर्थ्य), बल और बुद्धि की अधिकताको लाखों शेष भी नहीं गा सकते। वे एक ही बाण से सैकड़ों समुद्रों को सोख सकते हैं, परन्तु नीतिनिपुण श्रीरामजी ने [नीति की रक्षाके लिये] आपके भाई से उपाय पूछा।

संदर्भ

यह सुन्दरकाण्ड के “शुक की रावण को चेतावनी” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ५६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में शुक द्वारा रावण को राम की सेना की शक्ति बताना और लक्ष्मणजी की अंतिम चेतावनी का पत्र देना का वर्णन है।

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शुक की रावण को चेतावनी