राम कृपा बल पाइ कपिंदा
राम कृपा बल पाइ कपिंदा
चौपाई २, दोहा ३५ के अंतर्गत · सुन्दरकाण्ड
चौपाई पाठ
राम कृपा बल पाइ कपिंदा। भए पच्छजुत मनहुँ गिरिंदा॥ हरषि राम तब कीन्ह पयाना। सगुन भए सुंदर सुभ नाना॥ २ ॥
अर्थ
राम कृपा का बल पाकर श्रेष्ठ वानर मानो पंखवाले बड़े पर्वत हो गये। तब श्रीरामजी ने हर्षित होकर प्रस्थान (कूच) किया। अनेक सुन्दर और शुभ शकुन हुए।
संदर्भ
यह सुन्दरकाण्ड के “राम की सेना समुद्र तट पर” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ३५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीरामजी का वानर सेना सहित समुद्र तट पर शुभ प्रस्थान और पहुँचने का वर्णन है।
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राम की सेना समुद्र तट पर