प्रगट बखानहिं राम सुभाऊ

चौपाई १, दोहा ५२ के अंतर्गत · सुन्दरकाण्ड

चौपाई पाठ

प्रगट बखानहिं राम सुभाऊ। अति सप्रेम गा बिसरि दुराऊ॥ रिपु के दूत कपिन्ह तब जाने। सकल बाँधि कपीस पहिं आने॥ १ ॥

अर्थ

फिर वे प्रकट रूप में भी अत्यन्त प्रेम के साथ श्रीरामजी के स्वभाव की बड़ाई करने लगे, उन्हें दुराव (कपट वेष) भूल गया! तब वानरों ने जाना कि ये शत्रु के दूत हैं और वे उन सबको बाँधकर सुग्रीव के पास ले आये।

संदर्भ

यह सुन्दरकाण्ड के “शुक दूत का आना, लक्ष्मण का पत्र” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ५२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में समुद्र पार करने के उपाय, शुक दूत का आगमन और लक्ष्मण के पत्र सहित वापसी का वर्णन है।

पूरा प्रकरण पढ़ें

पूरा प्रकरण पढ़ें
शुक दूत का आना, लक्ष्मण का पत्र