परम क्रोध मीजहिं सब हाथा

चौपाई ३, दोहा ५५ के अंतर्गत · सुन्दरकाण्ड

चौपाई पाठ

परम क्रोध मीजहिं सब हाथा। आयसु पै न देहिं रघुनाथा॥ सोषहिं सिंधु सहित झष ब्याला। पूरहिं न त भरि कुधर बिसाला॥ ३ ॥

अर्थ

सब-के-सब अत्यन्त क्रोध से हाथ मीजते हैं। पर श्रीरघुनाथजी उन्हें आज्ञा नहीं देते। हम मछलियों और साँपों सहित समुद्र को सोख लेंगे। नहीं तो, बड़े-बड़े पर्वतों से उसे भरकर पाट देंगे।

संदर्भ

यह सुन्दरकाण्ड के “शुक की रावण को चेतावनी” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ५५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में शुक द्वारा रावण को राम की सेना की शक्ति बताना और लक्ष्मणजी की अंतिम चेतावनी का पत्र देना का वर्णन है।

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शुक की रावण को चेतावनी