नूतन किसलय अनल समाना

चौपाई ६, दोहा १२ के अंतर्गत · सुन्दरकाण्ड

चौपाई पाठ

नूतन किसलय अनल समाना। देहि अगिनि जनि करहि निदाना॥ देखि परम बिरहाकुल सीता। सो छन कपिहि कलप सम बीता॥ ६ ॥

अर्थ

तेरे नये-नये कोमल पत्ते अग्नि के समान हैं। आग दे, विरह-रोग का अन्त मत कर (अर्थात् विरह-रोग को बढ़ाकर सीमा तक न पहुँचा)। सीताजी को विरह से परम व्याकुल देखकर वह क्षण हनुमानजी को कल्प के समान बीता।

संदर्भ

यह सुन्दरकाण्ड के “श्रीसीता-त्रिजटा संवाद” प्रकरण का चौपाई ६, दोहा १२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सीता और त्रिजटा के संवाद तथा शुभ स्वप्न द्वारा आशा का संचार का वर्णन है।

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श्रीसीता-त्रिजटा संवाद