निमिष निमिष करुनानिधि जाहिं कलप सम
निमिष निमिष करुनानिधि जाहिं कलप सम
दोहा ३१ · सुन्दरकाण्ड
दोहा पाठ
निमिष निमिष करुनानिधि जाहिं कलप सम बीति। बेगि चलिअ प्रभु आनिअ भुज बल खल दल जीति॥ ३१ ॥
अर्थ
हे करुणानिधान ! उनका एक-एक पल कल्प के समान बीतता है। अतः हे प्रभु! तुरंत चलिये और अपनी भुजाओं के बल से दुष्टों के दल को जीतकर सीताजी को ले आइये।
संदर्भ
यह सुन्दरकाण्ड के “हनुमानजी का लौटना और राम को संदेश” प्रकरण का दोहा ३१ है। इस प्रकरण में हनुमानजी का समुद्र पार लौटना, मधुवन प्रवेश, सुग्रीव मिलन और श्रीराम को सीता का संदेश व चूड़ामणि अर्पण का वर्णन है।
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हनुमानजी का लौटना और राम को संदेश