नाथ भगति अति सुखदायनी

चौपाई १, दोहा ३४ के अंतर्गत · सुन्दरकाण्ड

चौपाई पाठ

नाथ भगति अति सुखदायनी। देहु कृपा करि अनपायनी॥ सुनि प्रभु परम सरल कपि बानी। एवमस्तु तब कहेउ भवानी॥ १ ॥

अर्थ

है नाथ! मुझे अत्यन्त सुख देनेवाली अपनी निश्चल भक्ति कृपा करके दीजिये। हनुमानजी की अत्यन्त सरल वाणी सुनकर, तब प्रभु श्रीरामचन्द्रजी ने 'एवमस्तु' (ऐसा ही हो) कहा।

संदर्भ

यह सुन्दरकाण्ड के “हनुमानजी का लौटना और राम को संदेश” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ३४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में हनुमानजी का समुद्र पार लौटना, मधुवन प्रवेश, सुग्रीव मिलन और श्रीराम को सीता का संदेश व चूड़ामणि अर्पण का वर्णन है।

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हनुमानजी का लौटना और राम को संदेश