मास दिवस महुँ कहा न माना
मास दिवस महुँ कहा न माना
चौपाई ५, दोहा १० के अंतर्गत · सुन्दरकाण्ड
चौपाई पाठ
मास दिवस महुँ कहा न माना। तौ मैं मारबि काढ़ि कृपाना॥ ५ ॥
अर्थ
यदि महीने भर में यह कहा न माने तो मैं इसे तलवार निकालकर मार डालूँगा।
संदर्भ
यह सुन्दरकाण्ड के “हनुमान का सीता दर्शन, रावण का धमकाना” प्रकरण का चौपाई ५, दोहा १० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में अशोकवाटिका में हनुमान का सीता-दर्शन और रावण द्वारा साम-दाम-भय से सीताजी को विचलित करने के प्रयास का वर्णन है।
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हनुमान का सीता दर्शन, रावण का धमकाना