भवन गयउ दसकंधर इहाँ पिसाचिनि बृंद

दोहा १० · सुन्दरकाण्ड

दोहा पाठ

भवन गयउ दसकंधर इहाँ पिसाचिनि बृंद। सीतहि त्रास देखावहिं धरहिं रूप बहु मंद॥ १० ॥

अर्थ

[यों कहकर] रावण घर चला गया। यहाँ राक्षसियों के समूह बहुत-से बुरे रूप धरकर सीताजी को भय दिखलाने लगे।

संदर्भ

यह सुन्दरकाण्ड के “हनुमान का सीता दर्शन, रावण का धमकाना” प्रकरण का दोहा १० है। इस प्रकरण में अशोकवाटिका में हनुमान का सीता-दर्शन और रावण द्वारा साम-दाम-भय से सीताजी को विचलित करने के प्रयास का वर्णन है।

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हनुमान का सीता दर्शन, रावण का धमकाना