ममता तरुन तमी अँधिआरी
ममता तरुन तमी अँधिआरी
चौपाई २, दोहा ४७ के अंतर्गत · सुन्दरकाण्ड
चौपाई पाठ
ममता तरुन तमी अँधिआरी। राग द्वेष उलूक सुखकारी॥ तब लगि बसति जीव मन माहीं। जब लगि प्रभु प्रताप रबि नाहीं॥ २ ॥
अर्थ
ममता पूर्ण अँधेरी रात है, जो राग-द्वेष रूपी उल्लुओं को सुख देने वाली है। वह (ममतारूपी रात्रि) तभी तक जीव के मन में बसती है, जब तक प्रभु (आप) का प्रतापरूपी सूर्य नहीं उदय होता।
संदर्भ
यह सुन्दरकाण्ड के “विभीषण की राम शरण” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ४७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में विभीषण के लंका त्यागकर श्रीराम की शरण में आने और प्रभु द्वारा कृपापूर्वक स्वीकार किए जाने का वर्णन है।
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विभीषण की राम शरण