ममता रत सन ग्यान कहानी
ममता रत सन ग्यान कहानी
चौपाई २, दोहा ५८ के अंतर्गत · सुन्दरकाण्ड
चौपाई पाठ
ममता रत सन ग्यान कहानी। अति लोभी सन बिरति बखानी॥ क्रोधिहि सम कामिहि हरिकथा। ऊसर बीज बएँ फल जथा॥ २ ॥
अर्थ
ममता में फँसे हुए मनुष्य से ज्ञान की कथा, अत्यन्त लोभी से वैराग्य का वर्णन, क्रोधी से शम (शान्ति) की बात और कामी से भगवान् की कथा, इनका वैसा ही फल होता है जैसा ऊसर में बीज बोने से होता है (अर्थात् ऊसर में बीज बोने की भाँति यह सब व्यर्थ जाता है)।
संदर्भ
यह सुन्दरकाण्ड के “राम का क्रोध, समुद्र की विनती” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ५८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम के धर्मसम्मत क्रोध और भयभीत समुद्र की विनम्र प्रार्थना एवं मार्गदर्शन का वर्णन है।
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राम का क्रोध, समुद्र की विनती