लछिमन बान सरासन आनू
लछिमन बान सरासन आनू
चौपाई १, दोहा ५८ के अंतर्गत · सुन्दरकाण्ड
चौपाई पाठ
लछिमन बान सरासन आनू। सोषौं बारिधि बिसिख कृसानू॥ सठ सन बिनय कुटिल सन प्रीती। सहज कृपन सन सुंदर नीती॥ १ ॥
अर्थ
हे लक्ष्मण! धनुष-बाण लाओ, मैं अग्निबाण से समुद्र को सोख डालूँ। मूर्ख से विनय, कुटिल के साथ प्रीति, स्वाभाविक ही कंजूस से सुन्दर नीति (उदारता का उपदेश),।
संदर्भ
यह सुन्दरकाण्ड के “राम का क्रोध, समुद्र की विनती” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ५८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम के धर्मसम्मत क्रोध और भयभीत समुद्र की विनम्र प्रार्थना एवं मार्गदर्शन का वर्णन है।
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राम का क्रोध, समुद्र की विनती