मैं पुनि उर धरि प्रभु प्रभुताई

चौपाई २, दोहा ६० के अंतर्गत · सुन्दरकाण्ड

चौपाई पाठ

मैं पुनि उर धरि प्रभु प्रभुताई। करिहउँ बल अनुमान सहाई॥ एहि बिधि नाथ पयोधि बँधाइअ। जेहिं यह सुजसु लोक तिहुँ गाइअ॥ २ ॥

अर्थ

मैं भी प्रभु की प्रभुता को हृदय में धारण कर अपने बल के अनुमान से सहायता करूँगा। हे नाथ! इस प्रकार समुद्र को बँधाइये, जिससे यह सुजसु लोक तिहुँ में गाया जाय।

संदर्भ

यह सुन्दरकाण्ड के “राम का क्रोध, समुद्र की विनती” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ६० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम के धर्मसम्मत क्रोध और भयभीत समुद्र की विनम्र प्रार्थना एवं मार्गदर्शन का वर्णन है।

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राम का क्रोध, समुद्र की विनती