जानउँ मैं तुम्हारि प्रभुताई
जानउँ मैं तुम्हारि प्रभुताई
चौपाई १, दोहा २२ के अंतर्गत · सुन्दरकाण्ड
चौपाई पाठ
जानउँ मैं तुम्हारि प्रभुताई। सहसबाहु सन परी लराई॥ समर बालि सन करि जसु पावा। सुनि कपि बचन बिहसि बिहरावा॥ १ ॥
अर्थ
मैं तुम्हारी प्रभुता को खूब जानता हूँ, सहस्रबाहु से तुम्हारी लड़ाई हुई थी और बाली से युद्ध करके तुमने यश प्राप्त किया था। हनुमानजी के [मार्मिक] वचन सुनकर रावण ने हँसकर बात टाल दी।
संदर्भ
यह सुन्दरकाण्ड के “हनुमान-रावण संवाद” प्रकरण का चौपाई १, दोहा २२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में रावण की सभा में हनुमान का निर्भीक संवाद और सीता-वापसी का उपदेश का वर्णन है।
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हनुमान-रावण संवाद