जाके बल लवलेस तें जितेहु चराचर
जाके बल लवलेस तें जितेहु चराचर
दोहा २१ · सुन्दरकाण्ड
दोहा पाठ
जाके बल लवलेस तें जितेहु चराचर झारि। तासु दूत मैं जा करि हरि आनेहु प्रिय नारि॥ २१ ॥
अर्थ
जिनके लेशमात्र बल से तुमने समस्त चराचर जगत् को जीत लिया और जिनकी प्रिय पत्नी को तुम [चोरी से] हर लाये हो, मैं उन्हीं का दूत हूँ।
संदर्भ
यह सुन्दरकाण्ड के “हनुमान-रावण संवाद” प्रकरण का दोहा २१ है। इस प्रकरण में रावण की सभा में हनुमान का निर्भीक संवाद और सीता-वापसी का उपदेश का वर्णन है।
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हनुमान-रावण संवाद