जनकसुता रघुनाथहि दीजे

चौपाई ४, दोहा ५७ के अंतर्गत · सुन्दरकाण्ड

चौपाई पाठ

जनकसुता रघुनाथहि दीजे। एतना कहा मोर प्रभु कीजे॥ जब तेहिं कहा देन बैदेही। चरन प्रहार कीन्ह सठ तेही॥ ४ ॥

अर्थ

जानकीजी श्रीरघुनाथजी को दे दीजिये। हे प्रभु! इतना कहना मेरा कीजिये। जब उस (दूत) ने जानकीजी को देने के लिये कहा, तब दुष्ट रावण ने उसको लात मारी।

संदर्भ

यह सुन्दरकाण्ड के “शुक की रावण को चेतावनी” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ५७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में शुक द्वारा रावण को राम की सेना की शक्ति बताना और लक्ष्मणजी की अंतिम चेतावनी का पत्र देना का वर्णन है।

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शुक की रावण को चेतावनी