एहि बिधि करत सप्रेम बिचारा

चौपाई १, दोहा ४३ के अंतर्गत · सुन्दरकाण्ड

चौपाई पाठ

एहि बिधि करत सप्रेम बिचारा। आयउ सपदि सिंधु एहिं पारा॥ कपिन्ह बिभीषनु आवत देखा। जाना कोउ रिपु दूत बिसेषा॥ १ ॥

अर्थ

इस प्रकार प्रेमसहित विचार करते हुए वे शीघ्र ही समुद्र के इस पार (जिधर श्रीरामचन्द्रजी की सेना थी) आ गये। वानरों ने विभीषण को आते देखा तो उन्होंने जाना कि शत्रु का कोई खास दूत है।

संदर्भ

यह सुन्दरकाण्ड के “विभीषण की राम शरण” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ४३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में विभीषण के लंका त्यागकर श्रीराम की शरण में आने और प्रभु द्वारा कृपापूर्वक स्वीकार किए जाने का वर्णन है।

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विभीषण की राम शरण