ए कपि सब सुग्रीव समाना
ए कपि सब सुग्रीव समाना
चौपाई १, दोहा ५५ के अंतर्गत · सुन्दरकाण्ड
चौपाई पाठ
ए कपि सब सुग्रीव समाना। इन्ह सम कोटिन्ह गनइ को नाना॥ राम कृपाँ अतुलित बल तिन्हहीं। तृन समान त्रैलोकहि गनहीं॥ १ ॥
अर्थ
ये सब वानर बल में सुग्रीव के समान हैं और इनके जैसे [एक-दो नहीं] करोड़ों हैं, उन बहुत-सों को गिन ही कौन सकता है? श्रीरामजी की कृपा से उनमें अतुलनीय बल है। वे तीनों लोकों को तृण के समान [तुच्छ] समझते हैं।
संदर्भ
यह सुन्दरकाण्ड के “शुक की रावण को चेतावनी” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ५५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में शुक द्वारा रावण को राम की सेना की शक्ति बताना और लक्ष्मणजी की अंतिम चेतावनी का पत्र देना का वर्णन है।
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शुक की रावण को चेतावनी