देखि राम बल पौरुष भारी
देखि राम बल पौरुष भारी
चौपाई ४, दोहा ६० के अंतर्गत · सुन्दरकाण्ड
चौपाई पाठ
देखि राम बल पौरुष भारी। हरषि पयोनिधि भयउ सुखारी॥ सकल चरित कहि प्रभुहि सुनावा। चरन बंदि पाथोधि सिधावा॥ ४ ॥
अर्थ
श्रीरामजी का भारी बल और पौरुष देखकर समुद्र हर्षित होकर सुखी हो गया। उसने उन दुष्टों का सारा चरित्र प्रभु को कह सुनाया। फिर चरणों की वन्दना करके समुद्र चला गया।
संदर्भ
यह सुन्दरकाण्ड के “राम का क्रोध, समुद्र की विनती” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ६० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम के धर्मसम्मत क्रोध और भयभीत समुद्र की विनम्र प्रार्थना एवं मार्गदर्शन का वर्णन है।
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राम का क्रोध, समुद्र की विनती