अबहिं मातु मैं जाउँ लवाई

चौपाई २, दोहा १६ के अंतर्गत · सुन्दरकाण्ड

चौपाई पाठ

अबहिं मातु मैं जाउँ लवाई। प्रभु आयसु नहिं राम दोहाई॥ कछुक दिवस जननी धरु धीरा। कपिन्ह सहित अइहहिं रघुबीरा॥ २ ॥

अर्थ

हे माता! मैं आपको अभी यहाँ से लिवा जाऊँ; पर श्रीरामचन्द्रजी की शपथ है, मुझे प्रभु की आज्ञा नहीं है। [अतः] हे माता! कुछ दिन और धीरज धरो। श्रीरामचन्द्रजी वानरों सहित यहाँ आएँगे।

संदर्भ

यह सुन्दरकाण्ड के “श्रीसीता-हनुमान संवाद” प्रकरण का चौपाई २, दोहा १६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सीताजी को श्रीराम की मुद्रिका और संदेश देने तथा उनके प्रभु-आगमन की आशा का संवाद का वर्णन है।

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श्रीसीता-हनुमान संवाद