तुरत चले कपि सुनि प्रभु बचना

चौपाई ३, दोहा १०६ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड

चौपाई पाठ

तुरत चले कपि सुनि प्रभु बचना। कीन्ही जाइ तिलक की रचना॥ सादर सिंहासन बैठारी। तिलक सारि अस्तुति अनुसारी॥ ३ ॥

अर्थ

प्रभु के वचन सुनकर वानर तुरंत चले और उन्होंने जाकर राजतिलक की सारी व्यवस्था की। आदर के साथ विभीषण को सिंहासन पर बैठाकर तिलक किया और स्तुति की।

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “विभीषण का राज्याभिषेक” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा १०६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में राम की आज्ञा से विभीषण का लंका के राजा के रूप में राजतिलक एवं धर्म-स्थापना का वर्णन है।

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विभीषण का राज्याभिषेक