जोरि पानि सबहीं सिर नाए
जोरि पानि सबहीं सिर नाए
चौपाई ४, दोहा १०६ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड
चौपाई पाठ
जोरि पानि सबहीं सिर नाए। सहित बिभीषन प्रभु पहिं आए॥ तब रघुबीर बोलि कपि लीन्हे। कहि प्रिय बचन सुखी सब कीन्हे॥ ४ ॥
अर्थ
सभी ने हाथ जोड़कर सिर नवाये। तदनन्तर विभीषणजी सहित सब प्रभु के पास आये। तब श्रीरघुवीर ने वानरों को बुला लिया और प्रिय वचन कहकर सबको सुखी किया।
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “विभीषण का राज्याभिषेक” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा १०६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में राम की आज्ञा से विभीषण का लंका के राजा के रूप में राजतिलक एवं धर्म-स्थापना का वर्णन है।
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विभीषण का राज्याभिषेक