तेहिं अंगद कहुँ लात उठाई

चौपाई ३, दोहा १८ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड

चौपाई पाठ

तेहिं अंगद कहुँ लात उठाई। गहि पद पटकेउ भूमि भवाँई॥ निसिचर निकर देखि भट भारी। जहँ तहँ चले न सकहिं पुकारी॥ ३ ॥

अर्थ

उसने अंगद पर लात उठायी। अंगद ने [वही] पैर पकड़कर उसे घुमाकर जमीन पर दे पटका (मार गिराया)। राक्षस के समूह भारी योद्धा देखकर जहाँ-तहाँ [भाग] चले, वे डर के मारे पुकार भी न मचा सके।

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “अंगद का लंका में रावण से संवाद” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा १८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में अंगद का लंका की सभा में रावण को सीता लौटाने और राम की शरण लेने का अंतिम अवसर देने का वर्णन है।

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अंगद का लंका में रावण से संवाद