ते तव सिर कंदुक सम नाना

चौपाई ३, दोहा २७ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड

चौपाई पाठ

ते तव सिर कंदुक सम नाना। खेलिहहिं भालु कीस चौगाना॥ जबहिं समर कोपिहि रघुनायक। छुटिहहिं अति कराल बहु सायक॥ ३ ॥

अर्थ

और रीछ-वानर तेरे उन गेंद के समान अनेकों सिरों से चौगान खेलेंगे। जब श्रीरघुनाथजी युद्ध में कोप करेंगे और उनके अत्यन्त तीक्ष्ण बहुत-से बाण छूटेंगे,।

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “अंगद का लंका में रावण से संवाद” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा २७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में अंगद का लंका की सभा में रावण को सीता लौटाने और राम की शरण लेने का अंतिम अवसर देने का वर्णन है।

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अंगद का लंका में रावण से संवाद