तव सोनित कीं प्यास तृषित राम

सोरठा ३३ (ख) · लंकाकाण्ड

सोरठा पाठ

तव सोनित कीं प्यास तृषित राम सायक निकर। तजउँ तोहि तेहि त्रास कटु जल्पक निसिचर अधम॥ ३३ (ख) ॥

अर्थ

श्रीरामचन्द्रजी के बाण-समूह तेरे रक्त की प्यास से तृषित हैं। [वे प्यासे ही रह जायाँगे] इस डर से, अरे कड़वी बकवाद करनेवाले नीच राक्षस! मैं तुझे छोड़ता हूँ।

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “अंगद का लंका में रावण से संवाद” प्रकरण का सोरठा ३३ (ख) है। इस प्रकरण में अंगद का लंका की सभा में रावण को सीता लौटाने और राम की शरण लेने का अंतिम अवसर देने का वर्णन है।

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अंगद का लंका में रावण से संवाद