तव बतकही गूढ़ मृगलोचनि

चौपाई ४, दोहा १६ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड

चौपाई पाठ

तव बतकही गूढ़ मृगलोचनि। समुझत सुखद सुनत भय मोचनि॥ मंदोदरि मन महुँ अस ठयऊ। पियहि काल बस मतिभ्रम भयऊ॥ ४ ॥

अर्थ

हे मृगनयनी! तेरी बातें बड़ी गूढ़ (रहस्यभरी) हैं, समझने पर सुख देनेवाली और सुनने से भय छुड़ानेवाली हैं। मंदोदरी ने मन में ऐसा निश्चय कर लिया कि पति को कालवश मतिभ्रम हो गया है।

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “मंदोदरी का राम-महिमा कथन” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा १६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में मंदोदरी द्वारा रावण को श्रीराम की दिव्य महिमा बताकर वैर छोड़ने की विनती का वर्णन है।

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मंदोदरी का राम-महिमा कथन