तानेउ चाप श्रवन लगि छाँड़े बिसिख

दोहा ९१ · लंकाकाण्ड

दोहा पाठ

तानेउ चाप श्रवन लगि छाँड़े बिसिख कराल। राम मारगन गन चले लहलहात जनु ब्याल॥ ९१ ॥

अर्थ

धनुष को कान तक तानकर श्रीरामचन्द्रजी ने भयानक बाण छोड़े। श्रीरामजी के बाणसमूह ऐसे चले मानो सर्प लहलहाते (लहराते) हुए जा रहे हों।

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “इंद्र का दिव्य रथ, राम-रावण युद्ध” प्रकरण का दोहा ९१ है। इस प्रकरण में इंद्र के दिव्य रथ पर आरूढ़ होकर श्रीराम और रावण का घोर युद्ध का वर्णन है।

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इंद्र का दिव्य रथ, राम-रावण युद्ध