तब सत बान सारथी मारेसि

चौपाई ४, दोहा ९१ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड

चौपाई पाठ

तब सत बान सारथी मारेसि। परेउ भूमि जय राम पुकारेसि॥ राम कृपा करि सूत उठावा। तब प्रभु परम क्रोध कहुँ पावा॥ ४ ॥

अर्थ

तब उसने श्रीरामजी के सारथी को सौ बाण मारे। वह श्रीरामजी की जय पुकारकर पृथ्वी पर गिर पड़ा। श्रीरामजी ने कृपा करके सारथी को उठाया। तब प्रभु अत्यन्त क्रोध को प्राप्त हुए।

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “इंद्र का दिव्य रथ, राम-रावण युद्ध” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ९१ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में इंद्र के दिव्य रथ पर आरूढ़ होकर श्रीराम और रावण का घोर युद्ध का वर्णन है।

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इंद्र का दिव्य रथ, राम-रावण युद्ध