तब रावन दस सूल चलावा
तब रावन दस सूल चलावा
चौपाई ३, दोहा ९२ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड
चौपाई पाठ
तब रावन दस सूल चलावा। बाजि चारि महि मारि गिरावा॥ तुरग उठाइ कोपि रघुनायक। खैंचि सरासन छाँड़े सायक॥ ३ ॥
अर्थ
तब रावण ने दस त्रिशूल चलाये और श्रीरामजी के चारों घोड़ों को मारकर पृथ्वी पर गिरा दिया। घोड़ों को उठाकर श्रीरघुनाथजी ने क्रोध करके धनुष खींचकर बाण छोड़े।
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “इंद्र का दिव्य रथ, राम-रावण युद्ध” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ९२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में इंद्र के दिव्य रथ पर आरूढ़ होकर श्रीराम और रावण का घोर युद्ध का वर्णन है।
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इंद्र का दिव्य रथ, राम-रावण युद्ध