तब हनुमंत नगर महुँ आए

चौपाई २, दोहा १०७ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड

चौपाई पाठ

तब हनुमंत नगर महुँ आए। सुनि निसिचरी निसाचर धाए॥ बहु प्रकार तिन्ह पूजा कीन्ही। जनकसुता देखाइ पुनि दीन्ही॥ २ ॥

अर्थ

तब हनुमानजी नगर में आये। सुनकर निसिचरीं और निसाचर दौड़े। उन्होंने बहुत प्रकार से हनुमानजी की पूजा की और फिर जनकसुता को दिखला दिया।

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “सीताजी को कुशल समाचार और अग्नि परीक्षा” प्रकरण का चौपाई २, दोहा १०७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में हनुमानजी द्वारा सीताजी को राम की कुशल सुनाना और सीताजी की अग्नि परीक्षा द्वारा पवित्रता प्रकट होने का वर्णन है।

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सीताजी को कुशल समाचार और अग्नि परीक्षा