सूपनखा कै गति तुम्ह देखी

चौपाई ७, दोहा ३६ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड

चौपाई पाठ

सूपनखा कै गति तुम्ह देखी। तदपि हृदयँ नहिं लाज बिसेषी॥ ७ ॥

अर्थ

शूर्पणखा की दशा तो आपने देख ही ली। तो भी आपके हृदय में उनसे लड़ने की बात सोचते हुए विशेष लज्जा नहीं आती!

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “मंदोदरी का रावण को पुनः समझाना” प्रकरण का चौपाई ७, दोहा ३६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में मंदोदरी द्वारा रावण को धर्म, नीति और राम के अतुल बल का स्मरण, किन्तु रावण का अहंकारवश अस्वीकार का वर्णन है।

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मंदोदरी का रावण को पुनः समझाना