सुर दुंदुभीं बजावहिं हरषहिं
सुर दुंदुभीं बजावहिं हरषहिं
चौपाई ५, दोहा ७१ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड
चौपाई पाठ
सुर दुंदुभीं बजावहिं हरषहिं। अस्तुति करहिं सुमन बहु बरषहिं॥ करि बिनती सुर सकल सिधाए। तेही समय देवरिषि आए॥ ५ ॥
अर्थ
देवता नगाड़े बजाते, हर्षित होते और स्तुति करते हुए बहुत-से फूल बरसा रहे हैं। विनती करके सब देवता चले गये। उसी समय देवर्षि आए।
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “कुंभकर्ण युद्ध और उसकी परमगति” प्रकरण का चौपाई ५, दोहा ७१ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में कुंभकर्ण के प्रचंड पराक्रम और श्रीराम के हाथों उसकी परमगति का वर्णन है।
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कुंभकर्ण युद्ध और उसकी परमगति