गगनोपरि हरि गुन गन गाए

चौपाई ६, दोहा ७१ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड

चौपाई पाठ

गगनोपरि हरि गुन गन गाए। रुचिर बीररस प्रभु मन भाए॥ बेगि हतहु खल कहि मुनि गए। राम समर महि सोभत भए॥ ६ ॥

अर्थ

आकाश के ऊपर से उन्होंने श्रीहरि के सुन्दर वीररसयुक्त गुण-समूह का गान किया, जो प्रभु के मन को बहुत ही भाया। मुनि यह कहकर चले गये कि अब दुष्ट रावण को शीघ्र मारिये। [उस समय] श्रीरामचन्द्रजी रणभूमि में आकर [अत्यन्त] सुशोभित हुए।

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “कुंभकर्ण युद्ध और उसकी परमगति” प्रकरण का चौपाई ६, दोहा ७१ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में कुंभकर्ण के प्रचंड पराक्रम और श्रीराम के हाथों उसकी परमगति का वर्णन है।

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कुंभकर्ण युद्ध और उसकी परमगति