सुनि प्रभु बचन बिभीषन हरषि गहे

दोहा ८० (ख) · लंकाकाण्ड

दोहा पाठ

सुनि प्रभु बचन बिभीषन हरषि गहे पद कंज। एहि मिस मोहि उपदेसेहु राम कृपा सुख पुंज॥ ८० (ख) ॥

अर्थ

प्रभु के वचन सुनकर विभीषणजी ने हर्षित होकर उनके चरणकमल पकड़ लिये [और कहा--] हे कृपा और सुख के समूह श्रीरामजी! आपने इसी बहाने मुझे [महान्] उपदेश दिया।

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “रावण का प्रस्थान, राम का विजय रथ” प्रकरण का दोहा ८० (ख) है। इस प्रकरण में रावण के युद्ध-प्रस्थान, राम के विजय रथ के महात्म्य और वानर-राक्षस संग्राम का वर्णन है।

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रावण का प्रस्थान, राम का विजय रथ