सुनि प्रभु बचन भालु कपि हरषे
सुनि प्रभु बचन भालु कपि हरषे
चौपाई ७, दोहा १०८ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड
चौपाई पाठ
सुनि प्रभु बचन भालु कपि हरषे। नभ ते सुरन्ह सुमन बहु बरषे॥ सीता प्रथम अनल महुँ राखी। प्रगट कीन्हि चह अंतर साखी॥ ७ ॥
अर्थ
प्रभु के वचन सुनकर रीछ-वानर हर्षित हो गये। आकाश से देवताओं ने बहुत-से फूल बरसाये। सीता को पहले अग्नि में रखा गया था। अब भीतर के साक्षी को प्रकट करना चाहते हैं।
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “सीताजी को कुशल समाचार और अग्नि परीक्षा” प्रकरण का चौपाई ७, दोहा १०८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में हनुमानजी द्वारा सीताजी को राम की कुशल सुनाना और सीताजी की अग्नि परीक्षा द्वारा पवित्रता प्रकट होने का वर्णन है।
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सीताजी को कुशल समाचार और अग्नि परीक्षा