स्रवत रुधिर धायउ बलवाना
स्रवत रुधिर धायउ बलवाना
चौपाई ५, दोहा ९२ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड
चौपाई पाठ
स्रवत रुधिर धायउ बलवाना। प्रभु पुनि कृत धनु सर संधाना॥ तीस तीर रघुबीर पबारे। भुजन्हि समेत सीस महि पारे॥ ५ ॥
अर्थ
रुधिर बहते हुए ही बलवान रावण दौड़ा। प्रभु ने फिर धनुष पर बाण सन्धान किया। श्रीरघुवीर ने तीस बाण मारे और बीसों भुजाओं समेत दसों सिर काटकर पृथ्वी पर गिरा दिये।
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “इंद्र का दिव्य रथ, राम-रावण युद्ध” प्रकरण का चौपाई ५, दोहा ९२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में इंद्र के दिव्य रथ पर आरूढ़ होकर श्रीराम और रावण का घोर युद्ध का वर्णन है।
पूरा प्रकरण पढ़ें
पूरा प्रकरण पढ़ें
इंद्र का दिव्य रथ, राम-रावण युद्ध