सोइ रघुबीर प्रनत अनुरागी
सोइ रघुबीर प्रनत अनुरागी
चौपाई ३, दोहा ७ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड
चौपाई पाठ
सोइ रघुबीर प्रनत अनुरागी। भजहु नाथ ममता सब त्यागी॥ मुनिबर जतनु करहिं जेहि लागी। भूप राजु तजि होहिं बिरागी॥ ३ ॥
अर्थ
हे नाथ! आप विषयों की सारी ममता छोड़कर उन्हीं शरणागत पर प्रेम करने वाले भगवान् का भजन कीजिये। जिनके लिये श्रेष्ठ मुनि साधन करते हैं और राजा राज्य छोड़कर वैरागी हो जाते हैं--
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “मंदोदरी का रावण को उपदेश” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में मंदोदरी द्वारा रावण को सीता-वापसी का उपदेश और रावण-प्रहस्त संवाद का वर्णन है।
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मंदोदरी का रावण को उपदेश