संत कहहिं असि नीति दसानन

चौपाई २, दोहा ७ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड

चौपाई पाठ

संत कहहिं असि नीति दसानन। चौथेंपन जाइहि नृप कानन॥ तासु भजनु कीजिअ तहँ भर्ता। जो कर्ता पालक संहर्ता॥ २ ॥

अर्थ

हे दशमुख ! संतजन ऐसी नीति कहते हैं कि चौथेपन (बुढ़ापे) में राजा को वन में चला जाना चाहिये। हे स्वामी ! वहाँ (वन में) आप उनका भजन कीजिये जो सृष्टि के रचने वाले, पालने वाले और संहार करने वाले हैं।

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “मंदोदरी का रावण को उपदेश” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में मंदोदरी द्वारा रावण को सीता-वापसी का उपदेश और रावण-प्रहस्त संवाद का वर्णन है।

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मंदोदरी का रावण को उपदेश